Jahannam Ka Bayaan | जहन्नम का बयान इस्लाम में
जहन्नम इस्लाम में एक बहुत ही भयानक और दर्दनाक स्थान है जिसे अल्लाह तआला ने उन लोगों के लिए तैयार किया है जो कुफ्र, शिर्क और ज़ुल्म पर डटे रहते हैं। कुरान और हदीस में जहन्नम की सज़ा, उसकी सूरत और वहाँ के अज़ाब का बार-बार ज़िक्र आता है ताकि इंसान अल्लाह की नाफ़रमानी से बच सके।
कुरान से जहन्नम का ज़िक्र
- अल्लाह तआला ने फरमाया:
“फत्तकुन-नारा अल्लती वक़ूदुहन-नासु वल-हिजारह।” (सूरह अल-बक़रा 2:24)
मतलब: “उस आग से बचो जिसका ईंधन इंसान और पत्थर हैं।” -
“इन्ना अअतदना लिल-काफिरीना नारा।” (सूरह अल-कहफ़ 18:29)
यानी: “हमने काफिरों के लिए आग तैयार कर रखी है।” -
“व यातीहल-मौतू मिन-कुल्ली मकानिव-वमा हुआ बि-मैयित।” (सूरह इबराहीम 14:17)
मतलब: “जहाँ से भी मौत आएगी, मगर वो मरेंगे नहीं (अज़ाब चलता रहेगा)।” -
“सौफ़ा यास्लौनारन hamiyah।” (सूरह अल-ग़ाशिया 88:4)
यानी: “वो गर्म और भड़कती हुई आग में झोंके जाएंगे।”
हदीस से जहन्नम का बयान
- रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
“जहन्नम को सत्तर हज़ार लगामें होंगी, हर एक लगाम को सत्तर हज़ार फ़रिश्ते खींच रहे होंगे।” (सहीह मुस्लिम 2842)
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“जहन्नम की आग दुनिया की आग से सत्तर गुना ज्यादा गर्म है।” (सहीह बुखारी 3265)
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“सबसे हल्की सज़ा यह होगी कि जहन्नमी के पैरों के नीचे आग की चप्पलें होंगी जिनसे उसका दिमाग खौल उठेगा।” (सहीह मुस्लिम 212)
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“अल्लाह की रहमत से मायूस होना जहन्नम की तरफ ले जाता है।” (तिर्मिज़ी)
जहन्नम की विशेषताएं
कुरान और हदीस में जहन्नम की कई भयानक खूबियाँ बताई गई हैं:
- यह एक अत्यंत गर्म, दर्दनाक और अंधकारमय स्थान है।
- जहन्नम की आग, धुआँ, ज़ह्र (poison) और तपिश इंसान की कल्पना से परे है। (सूरह अल-मुल्क 67:6)
- वहाँ ऐसा खाना मिलेगा जो गले में अटक जाएगा – “ज़क़्क़ूम का दरख़्त।” (सूरह वाकिआ 56:52)
- जहन्नमी लोग पानी मांगेंगे तो उन्हें पिघली हुई पीप और खौलता हुआ पानी दिया जाएगा। (सूरह इब्राहीम 14:16)
- जहन्नम की सज़ा कभी खत्म नहीं होगी (अनंतकाल)। (सूरह जिन्न 72:23)
जहन्नम के स्तर (Darakat)
कुरान और हदीस में जहन्नम के कई “दराज़ात / दरकात” बताए गए हैं:
- हावियाह (Hawiyah): सबसे निचला और सबसे भयानक स्तर।
- जहीम (Jaheem): तेज आग वाला स्तर।
- सक़र (Saqar): ऐसा स्थान जहाँ राहत का कोई नामोनिशान नहीं।
- लज़ा (Lazza): आग का एक विनाशकारी और जलाने वाला स्तर।
- सईर (Sa'eer): बहुत भड़कती हुई आग का स्तर।
- जहनम (Jahannam): सामान्य सज़ा का स्तर, मगर अत्यंत दर्दनाक।
जहन्नम में दाखिल होने के कारण
- कुफ्र और अल्लाह को न मानना।
- शिर्क – अल्लाह के साथ किसी और को साझी ठहराना।
- ज़ुल्म, गुनाह और बुरे काम में डटे रहना।
- नमाज़, रोज़ा, जकात जैसी फर्ज इबादतों को छोड़ देना।
- लोगों को तकलीफ पहुँचाना, हक़ मारना और गुनाह पर अड़े रहना।
- अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की अवज्ञा करना।
अल्लाह के बारे में सही तरीका (आपके दिए हुए पॉइंट्स शामिल)
- अल्लाह की महानता और शक्ति को मानना।
- अल्लाह की एकता (तौहीद) का इकरार करना।
- अल्लाह की रहमत और दया को याद रखना।
- अल्लाह के हुक्मों का पालन करना।
- अल्लाह से डरना और उनका सम्मान करना।
- अल्लाह के लिए जीवन को समर्पित करना।
- अल्लाह की प्रशंसा करना।
- अल्लाह से माफी माँगना और तौबा करना।
- अल्लाह की दया से उम्मीद रखना।
- अल्लाह के बारे में सही इल्म हासिल करना।

