निकाह का बयान | Nikaah Ka Bayaan in Islam

 का बयान इस्लाम में किया है

निकाह का बयान | Nikaah Ka Bayaan in Islam

निकाह (Marriage in Islam) इस्लाम में एक पवित्र और अहम सामाजिक अनुबंध है, जो पति और पत्नी के बीच जिम्मेदारी, प्रेम और इज़्ज़त पर आधारित होता है। निकाह को सुन्नत-ए-मुअक्कदा कहा गया है, यानी यह नबी ﷺ की पक्की सुन्नतों में से है।

निकाह का मतलब क्या है?

निकाह का अर्थ है विवाह या शादी। इस्लाम में निकाह एक इबादत (worship) भी है और एक मुक़द्दस रिश्ता भी, जो दो इंसानों को शरीयत के दायरे में साथ रहने की इजाज़त देता है।

कुरआन में निकाह का ज़िक्र

अल्लाह तआला कुरआन में फरमाता है:

“और हमने तुम में से ही तुम्हारे लिए जोड़े बनाए ताकि तुम उनके पास सुकून पाओ, और हमने तुम्हारे बीच मोहब्बत और रहमत रखी।”
(सूरह अर-रूम 30:21)

इस आयत से पता चलता है कि निकाह का मकसद केवल साथ रहना नहीं, बल्कि एक-दूसरे के लिए रहमत और सुकून का ज़रिया बनना है।

निकाह की अहमियत हदीस की रोशनी में

  • रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया: “निकाह मेरी सुन्नत है, जो मेरी सुन्नत से इंकार करे, वह मुझसे नहीं।” (बुखारी शरीफ)
  • एक और हदीस में आया है: “जब कोई शख्स निकाह करता है, तो उसने अपने आधे ईमान की हिफाज़त कर ली।” (तबरानी)

इन हदीसों से मालूम होता है कि निकाह न केवल सामाजिक बल्कि आध्यात्मिक तौर पर भी बहुत बड़ा अमल है।

निकाह के प्रकार (Types of Nikah in Islam)

  1. निकाह-ए-मुत्ताह: अस्थायी निकाह, जो एक तय अवधि के लिए किया जाता है (शिया फिक़्ह में मान्य)।
  2. निकाह-ए-मिस्यार: ऐसा निकाह जिसमें पति-पत्नी साथ रहने पर सहमत होते हैं, लेकिन कुछ जिम्मेदारियाँ छोड़ी जाती हैं।
  3. निकाह-ए-हालाल: शरीयत के मुताबिक़ किया गया सही निकाह जिसमें दोनों पक्ष आपसी सहमति से साथ रहते हैं।

निकाह के लिए आवश्यक शर्तें (Conditions of Nikah)

  • इजाज़त: दोनों पक्षों की स्पष्ट सहमति (Mutual Consent)।
  • वली (Guardian): लड़की के अभिभावक की मंज़ूरी ज़रूरी है।
  • महर (Dower): निकाह के वक़्त पति द्वारा पत्नी को दिया जाने वाला हक़।
  • गवाह (Witnesses): दो मुसलमान गवाहों की मौजूदगी में निकाह पढ़ा जाना चाहिए।

निकाह के फायदे (Benefits of Marriage in Islam)

  • आध्यात्मिक विकास: निकाह से ईमान और तक़्वा में इज़ाफ़ा होता है।
  • सामाजिक स्थिरता: निकाह से परिवार और समाज में स्थिरता आती है।
  • आर्थिक ज़िम्मेदारी: पति परिवार की देखभाल करता है, जिससे आर्थिक संतुलन कायम रहता है।
  • नैतिक सुरक्षा: निकाह इंसान को बुराइयों से बचाता है और नफ़्स पर काबू देता है।

निकाह का मकसद (Purpose of Marriage)

निकाह का असली मकसद केवल शारीरिक संतुष्टि नहीं बल्कि रूहानी और सामाजिक सुकून पाना है। यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें इंसान जिम्मेदार बनता है, अपने साथी का ख्याल रखता है, और समाज में अमन और मोहब्बत फैलाता है।

निकाह और परिवार निर्माण

इस्लाम में परिवार को समाज की नींव माना गया है, और निकाह उस नींव का पहला पत्थर है। एक नेक पत्नी या नेक पति के जरिए इंसान अपनी आख़िरत भी बेहतर बना सकता है।

रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया: “दुनिया एक फायदा है, और दुनिया का सबसे अच्छा फायदा नेक बीवी है।”
(मुस्लिम शरीफ)

निकाह में जिम्मेदारियाँ (Responsibilities in Marriage)

  • पति को पत्नी की ज़रूरतों, खर्च और सुरक्षा की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
  • पत्नी को अपने पति की इज़्ज़त और वफादारी करनी चाहिए।
  • दोनों को एक-दूसरे के हक़ का ख्याल रखना चाहिए और रहमत से पेश आना चाहिए।

निकाह के बारे में कुछ अहम इस्लामी बातें

  • निकाह को हल्का नहीं लेना चाहिए — यह एक पवित्र इबादत है।
  • अल्लाह तलाक़ को नापसंद करता है, लेकिन निकाह को पसंद करता है।
  • निकाह के ज़रिए नस्लें कायम होती हैं और उम्मत बढ़ती है।

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