Roza Rakhne Ke Fayede (Fazilat) | रोज़ा रखने के फ़ायदे इस्लाम में
रोज़ा (Fasting) इस्लाम का एक बुनियादी फर्ज़ है जो न सिर्फ़ इबादत है बल्कि इंसानी रूह, दिल और शरीर के लिए बेहतरीन इलाज भी है। कुरान और हदीस में रोज़े की फ़ज़ीलत, महत्व और उसके इनाम का बार-बार ज़िक्र मिलता है।
कुरान से रोज़े की फज़ीलत
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अल्लाह तआला ने फरमाया:
“ऐ ईमान वालों! तुम पर रोज़ा फ़र्ज़ किया गया है जैसे तुमसे पहले लोगों पर फ़र्ज़ किया गया था ताकि तुम परहेज़गार बनो।” (सूरह अल-बक़रा 2:183)
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एक और जगह फरमाया:
“रोज़ा तुम्हारे लिए बेहतर है, अगर तुम समझो।” (सूरह अल-बक़रा 2:184)
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कुरान रोज़ा और तक़वा का रिश्ता बयान करता है:
“ताकि तुम अल्लाह से डरने वाले बन जाओ।” (सूरह अल-बक़रा 2:187)
हदीस से रोज़े की अहमियत
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रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
“रोज़ा एक ढाल है जो इंसान को गुनाहों और जहन्नम से बचाता है।” (सहीह बुखारी 1894, मुस्लिम 1151)
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एक और मशहूर हदीस:
“जो इंसान रोज़ा रखता है, उसके लिए जन्नत का ‘रैय्यान’ नाम का दरवाज़ा होगा, जिसमें सिर्फ़ रोज़ेदार दाखिल होंगे।” (सहीह बुखारी 1896)
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नबी ﷺ ने फरमाया:
“रोज़ेदार के मुँह की ख़ुशबू अल्लाह के नज़दीक मुस्क की खुशबू से बेहतर है।” (सहीह मुस्लिम 1151)
रमजान महीने की फजीलत
- कुरआन की नाज़िल: रमजान में कुरआन मजीद नाज़िल हुआ।
- रोज़े का फर्ज़: मुसलमानों पर रमजान के रोज़े फ़र्ज़ हैं।
- नेकी का मौक़ा: इस महीने में हर नेकी का अज्र कई गुना बढ़ा दिया जाता है।
- अल्लाह की रहमत: रमजान रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना है।
रोज़ा रखने के फ़ायदे
रोज़ा इंसान की रूह, दिल और जिस्म को पाक करता है:
- आत्म-शुद्धि: रोज़ा इंसान को अपने नफ़्स पर क़ाबू करना सिखाता है।
- सबर और तक़वा: अल्लाह का डर और सब्र बढ़ता है।
- नेकी और अच्छे अमल: रमजान में नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।
- अल्लाह की इबादत: रोज़ा इबादत का बेहतरीन तरीका है।
- समाज में एकता: रोज़ा समाज में भाईचारा और हमदर्दी बढ़ाता है।
- हेल्थ बेनिफिट्स: रोज़ा डिटॉक्स, ब्लड शुगर कंट्रोल और दिल की सेहत में मदद करता है।
रमजान महीने की कहानी
रमजान महीने की शुरुआत में कुरआन मजीद की नाज़िल हुई और मुसलमानों पर रोज़ा फ़र्ज़ किया गया।
मुसलमान सहरी के साथ दिन का रोज़ा शुरू करते हैं और मग़रिब के बाद इफ्तार करते हैं।
रमजान के आख़िरी दिन ईद-उल-फितर मनाई जाती है और अल्लाह का शुक्र अदा किया जाता है।
रोज़े का अज्र और इनाम
- रोज़े का सवाब अल्लाह खुद देता है — “क्योंकि रोज़ा सिर्फ़ मेरे लिए है।” (सहीह बुखारी 1904)
- जन्नत का खास दरवाज़ा रैय्यान सिर्फ़ रोज़ेदारों के लिए है।
- रोज़ा गुनाहों को मिटाता है और इंसान को पाक कर देता है।


