Surah Yaseen Ki Fazilat | सूरह यासीन की फजीलत
सूरह यासीन इस्लाम में बहुत अहमियत रखती है। इसे “क़ल्बुल कुरआन” यानी कुरान का दिल कहा गया है। कुरान और हदीस दोनों में सूरह यासीन की फजीलत का जिक्र कई जगह मिलता है। नीचे कुछ महत्वपूर्ण दलीलें और हदीसें दी गई हैं।
कुरान से दलीलें
- सूरह यासीन की तारीफ: “यासीन, वल-क़ुरआनिल-हकीम” — “यासीन, क़सम है हिकमत वाले कुरान की।” (सूरह यासीन: 1-2)
- सूरह यासीन का मकाम: “व इन्नहू लहू अल-क़ुरआनुल-मजीद” — “यह एक महान कुरान है।” (सूरह यासीन: 77)
- दुआ की अहमियत: “रब्बना आतिना फिद्दुन्या हसनतन व फिल आखिरति हसनतन” — “ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भलाई दे और आख़िरत में भी भलाई दे।” (सूरह यासीन: 83)
- सूरह यासीन से सुकून: कुरान में अल्लाह तआला फरमाता है — “अला बिधिक्रिल्लाहि तत्मइनुल कुलूब” — “जान लो, अल्लाह की याद से दिलों को सुकून मिलता है।” (सूरह अर-रअद: 28)
- सूरह यासीन में इमान की दावत: “इत्तबिउ मन ला यसअलुकुम अज्रन व हम मुहतदून” — “उनकी पैरवी करो जो तुमसे कोई बदला नहीं मांगते और सीधी राह पर हैं।” (सूरह यासीन: 21)
हदीस से दलीलें
- कुरान का दिल: हज़रत अनस (रज़ि.) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया — “हर चीज़ का एक दिल होता है, और कुरान का दिल सूरह यासीन है। जो इसे पढ़े, अल्लाह उसके लिए सवाब लिख देता है।” (तिर्मिज़ी, हदीस 2887)
- मरने वालों के लिए पढ़ना: रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया — “अपने मरने वालों के पास सूरह यासीन पढ़ो।” (अबू दाऊद, हदीस 3121)
- दुआ की क़ुबूलियत: हज़रत अबू हुरैरा (रज़ि.) से रिवायत है — “जो व्यक्ति सूरह यासीन पढ़ेगा, उसकी दुआ कुबूल होगी।” (सुनन दारिमी)
- बरकत का ज़रिया: हज़रत इब्ने अब्बास (रज़ि.) ने फरमाया — “सूरह यासीन पढ़ने से घर में बरकत आती है और मुश्किलें आसान होती हैं।” (इब्ने माजा, हदीस 1366)
- गुनाहों की माफी: रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया — “जो व्यक्ति रात में सूरह यासीन पढ़े और अल्लाह की रज़ा चाहे, उसके गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।” (बैयहकी, शुअबुल ईमान)
सूरह यासीन पढ़ने के फायदे
- अल्लाह की रज़ा और रहमत हासिल होती है।
- दुआएँ कुबूल होती हैं।
- घर में बरकत और सुकून आता है।
- क़ब्र की अज़ाब से हिफाज़त होती है।
- मरने वालों के लिए पढ़ना सवाब का सबब है।
- दिल को सुकून और रूहानी सुकून मिलता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
सूरह यासीन की फजीलत कुरान और हदीस दोनों से साबित है। यह सूरह रहमत, बरकत और सुकून का ज़रिया है। हर मुसलमान को चाहिए कि वह इसे अपनी ज़िन्दगी का हिस्सा बनाए — ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी हासिल करे।



